1. करने के पहले कबीर की लोक-स्मृति के साथ संवाद जरूरी है। 2. समाज की लोक-स्मृति को ही नहीं, स्वयं कबीर को भी ऐसी कृपादृष्टि से 3. यह चाहिए कि ये यूरोपियन कबीर की इतनी व्यापक लोक-स्मृति में से खोज क्या 4. जब जीवाश्म मिलने शुरु हुए तो उनकी लोक-स्मृति की जड़ें वास्तविकता में धँसी थी, सभी ने स्वीकार लिया। 5. सो, खोजना यह चाहिए कि ये यूरोपियन कबीर की इतनी व्यापक लोक-स्मृति में से खोज क्या रहे थे? 6. फिर कैसे ये लोग दो-ढाई लाख साल पुराने हो सकते हैं? लेकिन यह सब कहीं भी भारतीय लोक-स्मृति में दर्ज नहीं है। 7. लोक-स्मृति का शाश्वत अंग और जनश्रुति का नायक बन चुके पंकज की भी सुधि हिन्दी-जगत के मठाधीशों ने कभी नहीं ली।8. लोक-स्मृति का शाश्वत अंग और जनश्रुति का नायक बन चुके पंकज की भी सुधि हिन्दी-जगत के मठाधीशों ने कभी नहीं ली।9. कबीर की ‘ खोज ' या उन पर ‘ शोध ' करने के पहले कबीर की लोक-स्मृति के साथ संवाद जरूरी है। 10. फिर कैसे ये लोग दो-ढाई लाख साल पुराने हो सकते हैं? लेकिन यह सब कहीं भी भारतीय लोक-स्मृति में दर्ज नहीं है।